फसल-उत्पादन-के-मूलभूत-सिद्धान्त

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भारत एक कृषि प्रधान देश है  देश की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर हैI इसलिए कृषि, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है 21 वीं सदी में देश के आर्थिक विकास के लिए यह आवश्यक है कि कृषि के विकास के लिए शीघ्र ही प्रभावी कदम उठाये जायें तथा देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा निरंतर अनुसंधान किये जायें I कृषि विकास के इस दौर में नवीनतम कृषि की तकनीकी का प्रयोग करना आवश्यक है जिससे कृषि उत्पादकों को अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके |

यह कोर्स कृषि के छात्रों तथा फसल उत्पादकों के लिए उपयोगी है  इस कोर्स का उद्देश्य फसल उत्पादन के मौलिक सिद्धान्तों से अवगत कराना है, जिससे कृषि फसलों का सफलतापूर्वक उत्पादन एवं उनका प्रबंधन किया जा सके |

 इस कोर्स के अंतर्गत फसलों का महत्व, वर्गीकरण, फसलचक्र, सिचाई एवं फसल उत्पादन जैसे कि खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी, शाक-भाजी एवं फल वाली फसलों को सम्मिलित किया गया है इसमें फसल उत्पादन की सभी क्रियाओं एवं प्रक्रियाओं को संदर्भित किया गया है|

पाठ्यक्रम में कौन-कौन सम्मिलित हो सकता है?

इंटरमीडिएट (कृषि) के छात्र
स्नातक (कृषि) के छात्र
फसल उत्पादक 

पाठ्यक्रम की सामग्री

फसलों का महत्व, वर्गीकरण, फसलचक्र तथा सिचाई प्रबंधन खाद्यान्न वाली फसलें
(धान, ज्वार, बाजरा, मक्का)
दलहनी फसलें
(अरहर, मूंग, उर्द, लोबिया)
तिलहनी फसलें
(मूंगफली, तिल, सोयाबीन, सूरजमुखी)
शाक-भाजी वाली फसलें
(टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिण्डी)
फल वाली फसलें
(आम, अमरुद, केला, पपीता)